Wednesday, May 27, 2026

शरतचंद्र की "देवदास" की समीक्षा

 शरतचंद्र की "देवदास" की समीक्षा --


शरदचंद्र चट्टोपाध्याय की 'देवदास' हिंदी साहित्य में एक बहुत चर्चित नाम है, जिसे अक्सर एक श्रेष्ठ रचना के तौर पर देखा जाता है।  यह उपन्यास सन् 1917 में प्रकाशित हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि जब शरद बाबू ने इसे लिखा था, तो वे खुद इस रचना को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं थे। उन्हें लगता था कि यह बहुत अधिक भावुक और अपरिपक़्व  काम है, और इसी संकोच के कारण उन्होंने इसे लगभग सोलह सालों तक प्रकाशित ही नहीं करवाया था। साहित्यिक हलकों में एक थ्योरी यह भी बहुत मशहूर है कि 'देवदास' का किरदार पूरी तरह काल्पनिक नहीं था, बल्कि ऐसा कहा जाता है कि इसमें शरद बाबू की अपनी जवानी के कुछ व्यक्तिगत इमोशन और उनके असफल प्रेम की छाया शामिल थी, हालाँकि इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है।

आप इसे पढ़ते हैं लेकिन यह आपके ऊपर कोई गहरा प्रभाव नहीं छोड़ता और न ही आपके हृदय को छूता है। हो सकता है कि बांग्ला में यह बहुत अच्छी लिखी गई हो, लेकिन इसका हिंदी अनुवाद जो मैंने पढ़ा वह औसत हिंदी में था, जिसने इसे एक औसत दर्जे की कथाकृति बना दिया।इस उपन्यास में पात्रों का विस्तृत वर्णन नहीं किया गया है, जिसके कारण आप किसी भी चरित्र के साथ अपने-आप को जोड़ नहीं पाते। बचपन में देवदास और पारो के बीच जिस तरह के नोक-झोंक को दिखाया गया है, वह कुछ ज्यादा ही बढ़-चढ़कर लगता है, जो बहुत अधिक स्वाभाविक नहीं प्रतीत होता।

यह कहानी देवदास, पारो और चंद्रमुखी के बीच के प्रेम के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि चुन्नी बाबू इसमें एक अलग और महत्वपूर्ण किरदार के रूप में आते हैं। देवदास और पारो के बचपन का प्रेम, जो समय के साथ मजबूत होता है, लेकिन सामाजिक भेदभाव के कारण मुकम्मल नहीं हो पाता, इस कहानी की नींव है।

अगर किरदारों के नजरिए से बात करें तो देवदास को उस दौर के हिसाब से एक बेहद कमज़ोर नायक माना गया, जो अपनी परिस्थितियों से लड़ने या कोई ठोस कदम उठाने के बजाय खुद को शराब में डुबा देता है। इसके विपरीत, चंद्रमुखी का किरदार अपने समय के रूढ़िवादी समाज के हिसाब से काफी बोल्ड, प्रगतिशील और सशक्त लिखा गया है, जो इस कहानी का एक मजबूत पक्ष है।

भले ही एक पाठक के तौर पर यह उपन्यास मुझे बहुत गहरा प्रभावित न कर सका हो, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा बार रूपांतरित होने वाली कहानियों में से एक है


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